Tuesday, February 9, 2010

शिवरात्रि के शुभ अवसर पर भगवान शिव को समर्पित

                       
                  

नमामीशमीशान निर्वाणरूपं विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम् |
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं चिदाकाशमाकाशवासं भजेङहम् ||१||


निराकारमोंकारमूलं तुरीयं गिराज्ञानगोतीतमीशं गिरीशम् |
करालं महाकालकालं कृपालं गुणागारसंसारपारं नतोङहम् ||२||


तुषाराद्रिसंकाशगौरं गभीरं मनोभूतकोटि प्रभाश्रीशरीरम् |
स्फुरन्मौलिकल्लोलिनी चारुगंगा लसदभालबालेन्दुकण्ठे भुजंगा ||३||


चलत्कुण्डलं भ्रुसुनेत्रं विशालं प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् |
मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं प्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि ||४||


प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशम् |
त्रयः शूलनिर्मूलनं शूलपाणिं भजेङहं भावानीपतिं भावगम्यम् ||५||


कलातिकल्याण कल्पान्तकारी सदा सज्जनान्ददाता पुरारी |
चिदानंदसंदोह मोहापहारी प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी ||६||


न यावद उमानाथपादारविन्दं भजन्तीह लोके परे वा नराणाम् |
न तावत्सुखं शान्ति संतापनाशं प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासम् ||७||


न जानामि योगं जपं नैव पूजां नतोङहं सदा सर्वदा शम्भुतुभ्यम् |
जरजन्मदुःखौ घतातप्यमानं प्रभो पाहि आपन्नमामीश शम्भो ||८||


रुद्रष्टकमिदं प्रोक्तं विपेण हरतुष्टये |
ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषां शम्भुः प्रसीदति ||


|| इति श्री गोस्वामी तुलसीदास कृतं श्री रुद्राष्टकम् संपूर्णं ||

Sunday, February 7, 2010

कालसर्प दोष निवारण हेतु कुछ उपाय


           

कालसर्प के बारे में बहुत सी भ्रांतियां सुनने को मिलती हैं.कालसर्प योग के बारे में पूरी तरह जानने के लिए इसका विस्तृत अध्ययन बहुत जरुरी है .कालसर्प के बारे में कुछ विद्वानों का मत है कि यह दोष अशुभ फलदायी होता है, जबकि कुछ विद्वान इस दोष को शास्त्र-सम्मत नहीं मानते.क्योंकि संसार के अनेक विद्वान, प्रतिष्ठित एवं राजनेताओं की जन्म कुंडली में यह दोष मौजूद है. उन्होंने इस दोष के होते हुए भी जीवन में कभी अभाव का अनुभव नहीं किया, बल्कि अपने-अपने कार्य क्षेत्र में अपनी प्रतिभा के दम पर सफलता और यश अर्जित किया.इसलिए मात्रा कालसर्प योग सुनकर भयभीत हो जाने की जरूरत नहीं बल्कि उसका ज्योतिषीय विश्लेषण करवाकर उसके प्रभावों की विस्तृत जानकारी हासिल कर लेना ही बुध्दिमत्ता कही जायेगी. जब असली कारण ज्योतिषीय विश्लेषण से स्पष्ट हो जाये तो तत्काल उसका उपाय करना चाहिए.

प्रत्येक मनुष्य कोई न कोई परेशानी से गुजरता है . कालसर्प दोष एक ऐसा नाम है जिससे आज का आम व्यक्ति अच्छी तरह से परिचित है. कुछ लोगों का तो ये हाल है कि जन्म कुंडली देखते ही चौंक पडते है और कह उठते है की तुम्हारी कुंडली में तो कालसर्प-दोष है क्या तुमने इसका कोई उपाय किया या नहीं. अगर सामने वाला व्यक्ति ये कहें कि मुझे तो इसके बारे में कुछ भी नहीं मालुम, मुझे आज तक किसी ने कुछ नहीं बताया या फिर मुझे मालुम तो था किन्तु मैने अभी तक कोई उपाय नहीं किया हैं। इतना सुनते ही कालसर्प-दोष को बताने वाला व्यक्ति सामने वाले व्यक्ति को कालसर्प-दोष के बारे में पूरा भाषण दे डालता है और फिर अनेको उपाय बताने लगता है.

कालसर्प दोष निवारण हेतु कुछ साधारण से उपाय भी हैं जिनसे इस दोष का निवारण किया जा सकता है. यदि पति-पत्नी या प्रेमी-प्रेमिका में क्लेश हो रहा हो, आपसी प्रेम की कमी हो रही हो तो भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या बालकृष्ण की ‍मूर्ति जिसके सिर पर मोरपंखी मुकुट धारण हो घर में स्थापित करें एवं प्रति‍दिन उनका पूजन करें एवं ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय अथवा ऊँ नमो वासुदेवाय कृष्णाय या ॐ नम: शिवाय का यथाशक्ति जाप करे. कालसर्प योग की शांति होगी। यदि कुंडली में कालसर्प दोष है तो नित्य प्रति भगवान शिव के परिवार का पूजन करें. आपके हर काम होते चले जाएँगे.यदि रोजगार में तकलीफ आ रही है अथवा रोजगार प्राप्त नहीं हो रहा है तो पलाश के फूल गोमूत्र में डूबाकर उसको बारीक करें. फिर छाँव में रखकर सुखाएँ. उसका चूर्ण बनाकर चंदन के पावडर में मिलाकर शिवलिंग पर त्रिपुण्ड बनाए.21 दिन या 25 दिन में नौकरी अवश्य मिलेग‍ी. शिवलिंग पर प्रतिदिन मीठा दूध में थोड़ी भाँग डाल दें, फिर इसे शिवलिंग पर चढ़ाएँ इससे गुस्सा शांत होता है, साथ ही सफलता तेजी से मिलने लगती है.यदि शत्रु से भय है तो चाँदी के अथवा ताँबे के सर्प बनाकर उनकी आँखों में सुरमा लगा दें, फिर किसी भी शिवलिंग पर चढ़ा दें, भय दूर होगा व शत्रु का नाश होगा,  नारियल के गोले में सप्त धान्य(सात प्रकार का अनाज), गुड़, उड़द की दाल एवं सरसों भर लें व बहते पानी में बहा दें अथवा गंदे पानी में (नाले में) बहा दें, आपका चिड़चिड़ापन दूर होगा। यह प्रयोग राहूकाल में करें. कालसर्प योग वाले  श्रावण मास में प्रतिदिन रूद्र-अभिषेक कराए एवं महामृत्युंजय मंत्र की एक माला रोज करें. जीवन में सुख शांति अवश्य आएगी और रूके काम होने लगेंगे.साथ ही साथ शुभ मुहूर्त में बहते पानी में कच्चा कोयला तीन बार प्रवाहित करें.हनुमान चालीसा का 108 बार पाठ करें तथा भोजनालय (घर की रसोई )में बैठकर भोजन करें.साथ ही तांबे का बना सर्प विधिवत पूजन के उपरांत शिवलिंग पर समर्पित करें. इससे अनुकूल प्रभाव पड़ेगा और कालसर्प दोष का निवारण होगा.

Tuesday, February 2, 2010

भगवन कृष्ण



भगवन कृष्ण की मनोहारी विभिन्न छवियों को एक प्रदर्शनी में देख कर इसे अपने ब्लॉग पर प्रदर्शित करने का विचार आया जिसे आज आप सभी के अवलोकनार्थ प्रस्तुत कर रहा हूँ.